नई दिल्ली: प्रसिद्ध इंजीनियर, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। वे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं और उनका कहना है कि उनका आंदोलन केवल किसी एक व्यक्ति या क्षेत्र के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए है। उनकी बिगड़ती सेहत ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
कब शुरू हुआ अनशन?
सोनम वांगचुक ने 28 जून 2026 से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। रिपोर्टों के अनुसार, वे लंबे समय से केवल नमक और पानी के सहारे हैं। उनकी तबीयत लगातार कमजोर हुई है और उनका वजन भी काफी कम हो गया है। डॉक्टरों की निगरानी में उनका स्वास्थ्य लगातार मॉनिटर किया जा रहा है।
आखिर क्यों कर रहे हैं अनशन?
सोनम वांगचुक का कहना है कि उनका आंदोलन कई महत्वपूर्ण मुद्दों से जुड़ा है। हालिया आंदोलन में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और परीक्षा प्रणाली से जुड़े सवालों को प्रमुखता से उठाया है। इसके साथ ही वे पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर भी लगातार आवाज उठा रहे हैं। आंदोलनकारी सरकार से संवाद और ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
लद्दाख के लिए पहले भी कर चुके हैं आंदोलन
यह पहली बार नहीं है जब सोनम वांगचुक किसी मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे हों। इससे पहले भी वे लद्दाख को संवैधानिक संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की मांग को लेकर कई बार भूख हड़ताल और पदयात्रा कर चुके हैं। उनका मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों का संतुलित विकास और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता होनी चाहिए।
बिगड़ती सेहत बनी चिंता का विषय
भूख हड़ताल के कई दिन बीत जाने के बाद सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उनका वजन करीब 9 किलोग्राम तक घट चुका है। डॉक्टरों ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार नजर रखने की सलाह दी है, जबकि कई सामाजिक संगठनों और सार्वजनिक हस्तियों ने सरकार से बातचीत शुरू करने की अपील की है।
देशभर से मिल रहा समर्थन
सोनम वांगचुक के आंदोलन को कई सामाजिक संगठनों, छात्रों और विभिन्न क्षेत्रों जैसे बॉलीवुड और राजनेताओ तथा शिक्षकों जैसी प्रमुख हस्तियों का समर्थन मिल रहा है। कई लोगों का मानना है कि उनकी मांगों पर सरकार को संवाद के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए। वहीं कुछ लोगों ने आंदोलन जल्द समाप्त करने की भी अपील की है ताकि उनकी सेहत पर और बुरा असर न पड़े।
कौन हैं सोनम वांगचुक?
सोनम वांगचुक लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर, नवाचार विशेषज्ञ और शिक्षा सुधारक हैं। उन्होंने SECMOL की स्थापना की, जहां व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है। इसके अलावा उन्होंने आइस स्तूप (Ice Stupa) जैसी तकनीक विकसित की, जो लद्दाख जैसे ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में जल संरक्षण का प्रभावी माध्यम बनी। वर्ष 2018 में उन्हें रैमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वे बॉलीवुड फिल्म ‘3 इडियट्स’ के लोकप्रिय किरदार ‘रैंचो’ की प्रेरणा के रूप में भी जाने जाते हैं।
निष्कर्ष
सोनम वांगचुक का अनशन केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षा, पर्यावरण और जनहित से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस को आगे बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है। उनकी सेहत को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं, जबकि समर्थक सरकार और आंदोलनकारियों के बीच जल्द संवाद की उम्मीद जता रहे हैं। आने वाले दिनों में इस आंदोलन की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी रहेगी। और उम्मीद है की जल्द ही सरकार और आंदोलन पर बैठे साथियो के बीच में चर्चा होगी और समस्याओ का समाधान निकाला जायेगा।